मैंने कहा जो आप पिला दो। चाची बोली पक्का ना बाद में मना मत कर देना राजा। मैंने कहा नहीं। चाची बोली ठीक हैं अभी तो चाय पीले वो वाली चीज बाद में पिलाऊंगी। चाची नाव और चोली में ही रसोई की ओर चली गई। मेरी तो हालत ही खराब थी और ओजार था कि बैठने का नाम ही नहीं ले रहा था। मैंने कुछ देर सोचा और फेसला किया कि एक बार हिला ही लेता हूँ और चाची के बिस्तर पर बैठ कर नाव को नीचे किया और अपना सामान हिलाने लगा। दिमाग में चाची की साफ गुफा ही आ रही थी और मेरा हाथ पूरी स्पीड में अपना काम कर रहा था और करीब साथ मिनिट में ही मेरा पानी निकलने को आया मैं चाची के बेड पर था और मेरा मुह दरवाजे के सामने था दोस्तों हमारा परिवार एक छोटे से शहर में रह हमारे दो कमरों का एक मकान है, जिसमें एक कमरे में अबू और अम्मी सोते हैं, दुसरे में और भाई जान।
कोई महमान आ जाये तो हम छट पर सो जाते हैं, मेरे वालिद और अम्मी मुझे बहुत ही प्यार करते हैं, और मेरी जरूरतों का ध्यान भी रखते हैं। क्लास में मे लेकिन मुझे अभी तक कोई खुदाई का अवसर नहीं मिला था। और मैं कई बार अपना बिस्तर खराब कर देता था। ऐसे ही एक दिन मेरे एक दोस्त जिसका नाम साहिल है ने मुझे पहली बार एक बात बताई कि औजार हिलाने से बहुत ही मज़ा आता है और उसने मुझे ह ऐसे ही एक दिन अम्मी बोली बेटा जा निगार चाची को ये चिकन कोर्मा देकर आजा निगार चाची की उम्र तो 40 साल की थी पर चाची का फिगर तौबा अपसराव को भी मात देता था और उनके संतरे माशाललाह कयामत ही थे
मैं चाची जान के घर की तरफ निकल गया उनके और निगार चाची एक बड़ा सा तोलिया लपेटे हुए बाहर आई और मुझे देख कर खुश हो गई और बोली बेटा आज रास्ता कैसे भूल गए और चाची की याद कैसे आ गई तुमको आजा अंदर आजा चाची ने मेरा हाथ पकड़ कर अंदर खीच कर दरवाजा बं� मैं हैनरान था कि चाची बोली आजा मेरे रूम में चलते हैं और मुझे अपने रूम की तरफ ले गई मैं बता दू कि मेरे चचा जान दिल्ली में जॉब करते हैं और चाची अकेली ही रहती है घर पर एक पुराना नौकर भी था लेकिन इस वक्त चाची अकेली थी चाची ने चाची खुश हो गई और बोली वाहरे मेरी आपा मेरी अम्मी को चाची आपा बुलाती थी मुझे चिकन कोर्मा भेजा है मज़ा आ गया आज तो और चाची वही पर बैठ कर कोर्मा खाने लगी कोर्मा खाते कई बार चाची का संतरा दिख जाता था
उनकी दरार देख कर मेरी स और मेरा घोड़ा खड़ा हो गया निगार चाची ने कोर्मा खत्म कर दिया और बोली ओह जावेद कितनी बेशर्म हूँ मैं तुम्हें तो पूछा ही नहीं मैंने कहा कोई नहीं चाची मैं घर से ही खा के आया हूँ तो चाची बोली, खाकर आये हो तो कुछ पीकर जाओ, बताओ क्या पीओगे ठंडा या गरम या घर का दूद। चाची धीमे से अपने संतरों को उभार कर बोली, जावेद, तुम तो चाची से खेरियत भी पूछने नहीं आते हो, और अब्बू के बाद कितने दिन से आये हो चाची अभी भी तोलिया लपेटे हुए ही थी और फिर चाची बोली मैं कपड़े पहन लेती हूँ मैं चाची के बेडरूम में ही था तो मैं खड़ा होकर बाहर जाने लगा तो चाची बोली क्या हुआ जावेद मैंने कहा चाची आप कपड़े बदल लो चाची बोली पागल फिर चाची ने मेरे सामने अपना तोलिया अपने से उतार लिया क्या नजारा था दो बड़े बड़े कबूतर बुरी तरह से हिल रहे थे और मेरा ओजार तो जैसे मेरी नाव ही फाड देने वाला था मैंने पहली बार किसी के संतरे इस हालत में देखे थे और वो भी इतने ब� जा सामने की अलमारी से मेरी चोली और नाव तो ला देना मेरा राजा। चाची ने राजा ऐसे कहा कि पूछो ही मत।
मैंने अलमारी खोली उसमें बहुत सी चोलिया थी तो मैंने चाची से पूछा कौन सी लाओ चाची। चाची बोली जो तुमको पसंद हो जावेद मिया। फ चाची जान को इस हालत में देख कर कुछ हो गया है। मैं सकपका सा गया और चाची के पीछे आ गया और चाची को पहनाने की कोशिश करने लगा। मैंने कभी किसी को पहनाई तो थी नहीं तो दो तीन बार कोशिश की लेकिन नहीं पहना सका। चाची हसी और बोली वाह रे रा इस बात से मुझे गुस्सा सा आ गया और में रुआसा सा हो गया ये देखकर चाची बोली राजा मैं तो मजाग कर रही हूँ क्या तुमने कभी किसी की उतारी है या नहीं मैंने कहा चाची आपकी कसम मैंने कभी भी किसी की नहीं उतारी और ना ही पहनाई है आज पहली ही बार और मैं चाची को पहनाने लगा। मेरे हाथ चाची के मस्त पपीते जैसे संतरों पर लगते ही करंट आ गया।
और मेरा ओजार चाची की खाई में चुबने लगा। चाची बोली, अब जल्दी से नाव भी पहना दें। मैं तो जैसे पागल ही हो गया आज जिन्दगी में पहल काली काली घास के बीच में लाल सा दर्वाजा ओह में तो पूरा ही पागल हो गया और बुरी तरह से आँखें फाड़ कर चाची की गुफा को देखने लगा करीब पांच मिनिट बाद चाची बोली राजा क्या हुआ पहनाएगा या नहीं मैं जैसे ही नीन से जागा और बोला चाची का चहरा भी लाल हो गया था चाची भी जोर जोर से सांसे भर रही थी और उनके संतरे उपर नीचे हो रहे थे चाची बोली ठीक है राजा अब बता क्या पियेगा मैंने कहा जो आप पिला दो चाची बोली पक्का ना बाद में मना मत कर देना राजा मैंने कहा नहीं चा चाची नाव और चोली में ही रसोई की ओर चली गई।
मेरी तो हालत ही खराब थी और ओजार था कि बैठने का नाम ही नहीं ले रहा था। मैंने कुछ देर सोचा और फेसला किया कि एक बार हिला ही लेता हूँ और चाची के बिस्तर पर बैठ कर नाव को नीचे किया और अपना दिमाग में चाची की साफ गुफा ही आ रही थी, और मेरा हाथ पूरी स्पीड में अपना काम कर रहा था, और करीब साथ मिनिट में ही मेरा पानी निकलने को आया, मैं चाची के बेड पर था, और मेरा मुह दरवाजे के सामने था, अचानक से दरवाजा खुला, मेरी तो हालत ही खराब हो गई। चाची ने मेरी तरफ देखा और जो ही चाची की नजर मेरे औजार पर पड़ी वो अवाक रह गई।
मैं आप लोगों को बता दूं। मेरा ओजार करीब दस इंच का था और उसकी मोटाई करीब दो की थी चाची की नजरे मेरे ओजार से चिपक कर रह गई और चाची धीरे से मेरी तरफ आई और बोली जावेद इतना बड़ा ओजार छुपा रखा है और हमको खबर भी नहीं चाची ने मेरा ओजार पकड़ लिय और पानी बह बह कर चाची के मुह की ओर जा रहा था और चाची उससे अपनी जीब से पी रही थी और चाची ने कहा जावेद तुम हाथ से ये सब करोगे तो तेरा औजार खराब हो जाएगा और तुम कमजोर भी हो जाओगे क्या तुम्हारी किसी से दोस्ती नहीं है मैंने कह मुझे माफ कीजिये प्लीज। चाची बोली, ऐसे कैसे माफ कर दूँ और तूने मेरा मुह भी तो खराब किया है, उसका क्या।
चाची धीरे, धीरे मेरे औजार को हिला रही थी और चाची ने मुझे बेट पर लिटा दिया। और सवार हो गई, मेरे को पीने लगी और अपने अब मैं तेरा ओजार खराब करूँगी अपनी गुफा से। चाची मेरे दोनों हाथ पकड़ कर उपर आ गई और मेरे घोटे पीने लगी। मेरा ओजार फिर से खड़ा हो गया और फिर चाची ने अपनी नाव को उतार दिया और बोली आजा राजा। अब तू असली मजा ले ले। चाची ने अपने दरवाजे पर मेरा ओजार अडा दिया और ताबड तोड धक्के मारने लगी। मैं हवा में उडने लगा और अपनी पहली खुदाई का सुख महसूस करने लगा। चाची बोल रही थी। यहां तेरी चाची गाजर से काम चलात मैं अब खुदाई की मस्ती में नहा चुका था। और मैंने अब चाची को बेड पर डाल दिया और अपना ओजार चाची की गुफा में डालने लगा।
लेकिन मेरे अनाडीपन की वजह से मुझे गुफा की जगह खाई मिल गई। तभी चाची ने एक हलका सा थपड मारा और � अब मैं धक्के लगा रहा था और करीब 20 मिनिट की तूफानी खुदाई के बाद जब हम जढडने को आये तो मज़े के मारे चाची ने मेरी पर अपने लगा दिये लेकिन मुझे वो मज़ा मिला जिसके आगे ये सब क्या पूरा जहां लुटाया जा सकता था करीब आधे घं� मुझे हर तरह से खुश करने की कोशिश भी करते हैं और वो ये भी कहते हैं कि निगार में जानता हूँ कि मेरा औजार ज्यादा बड़ा नहीं है लेकिन तुम अगर इससे खुश नहीं हो तो कोई दुसरा रास्ता करते हैं और जावेद उन्होंने मुझे शहर से ये औजार भ
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