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रात में अचानक आवाज़ें आईं

 

एक दिन जब मैं सो रहा था, तो अचानक रात में मेरी आँखे खुली. मुझे प्यास लगी थी. मैं उठा और पानी पीने किचन में गया. पानी पीकर जब मैं वापस अपने रूम में जा रहा था, तो मुझे कुछ अजीब तरह की आवाज सुनाई दी. तो मैंने उसे ध्यान से सुना, तो आवाज सोनी के रूम से आ रही थी. मैं रूम के नस्दीक गया, तो दरवाजा अंदर से बंद था. वो आवाज मुझे अजीब सी लग रही थी, तो मैं अंदर देखना चाह रहा था. तभी मेरी नजर खिड़की पर गई, जो थोड़ी खुली थी. वहां से जब मैंने अंदर देखा, तो अंदर का नजारा हैरान कर देने वाला था. अंदर सोनी और मेरी बड़ी दीदी राणी, जो बिलकुल बिना कपडों की थी, सिक्स्टी नाइन पोजिशन में एक दूसरी की गुफा चाट रही थी. मैं तो आँखों पर यकीन नहीं कर पा रहा था. मगर फिर उनका ये खेल मैं वही खड़ा होकर देखने लगा और मुझे भी मज़ा आने लगा. मेरा आउजार भी अब तनाव में आ गया था. फिर मुझे ध्यान आया कि ये तो मेरी बहने हैं, मुझे ऐसा नहीं सोचना चाहिए. कुछ देर देखने के बाद मैं अपने रूम में चला गया. मैं अपना आउजार हिला कर सो गया.

अगले दिन मैंने फिर से वही आवाज सुनी और मैं रात को वही पर देखने गया. मगर आज सोनी तो थी लेकिन मेरी सबसे बड़ी बेहन राणी नहीं थी. बलकि उसकी जगह काजल थी. उस दिन मैंने काजल को बिना कपडों के देखा. फिर मैं अपने रूम में गया और मार कर सो गया. इस तरह से अगले दिन फिर मैंने सोनी के साथ जया और फिर मोनी को भी देखा. अब मैं जान गया कि मेरी बेहने ठुकाई की प्यास ही हैं और वो लेस्बियन ठुकाई करने अपनी गुफा की प्यास को बुज़ाने की कोशिश करती रहती हैं. मुझे भी अब रोज उनको बीना कपडों की देखने की आदत हो चुकी थी. एक दिन तो मैंने उन पांचों को ही एक साथ बिना कपडों की देखा. सब की सब एक दूसरी की गुफा को पी रही थी. संतरे को दबा रही थी. तो अब मैं उनका ये लेस्बियन ठुकाई देखकर बहुत उत्तेजित हो जाता था. मैं ये नजारा देखकर बहुत गर्म हो गया. फिर मैंने रूम में जाकर आउजार हिलाया और माल निकाला. उसके बाद मुझे कब नीद आई मुझे पता नहीं चला.

सुभह का नाश्ता हम लोगों ने साथ में किया. मैं खाना खाने से ज्यादा अपनी बेहनों को देख रहा था. सब की संतरे को देख रहा था जो पपीतों की तरह लटकी हुई थी. उनके गुलाबी भी पता चल रहे थे. ये सब देख मेरा आउजार मेरी पैंट में फनफना उठा था. फिर उस दिन मा पापा और मेरी चारों बेहनों को कहीं जाना था तो वो सब चले गए. घर में सिर्फ मैं और सोनी थे. सोनी बैटकर कुछ सोच रही थी. तभी मैं वहां आकर बैठ गया और सोनी से बात करने लगा. मैंने सोचा कि ये अच्छा मौका है सोनी से पूछने का. मैंने उस से बातों ही बातों में पूछा, तुम रात को बिना कपडों के क्या कर रही थी? ये सुनते ही वो डर गई. ऐसा लगा कि उसके शरीर से जान निकाल ली हो किसी ने. तभी मैंने उसकी जांग पर हाथ रखते हुए कहा, डरो मत, इस उम्र में सब करते हैं. उसकी पैरों को चूटे ही इधर मेरा आउजार खड़ा हो गया था. मैं उस समय शॉट पैंट में था. मेरा खड़ा आउजार सोनी को साफ दिख रहा था और उसकी नजर मेरे आउजार से हट नहीं रही थी. मैं उसकी पैर को सहलाता जा रहा था. तभी मैंने सोनी से पूछा, क्या देख रही हो? वो बोली, कुछ नहीं, कुछ नहीं. मैं तो समझ गया था कि वो मेरा आउजार देख रही थी. मेरा मन उसको खोदने का कर रहा था. और उसके शरीर की हलचल को देखकर लगा कि वो भी खोदने के लिए पगला रही है. मैं बिना शर्म किये बोला, तुम मेरा खड़ा आउजार देख रही हो, मैं जानता हूँ. फिर वो हसने लगी. अब मैंने आगे बढ़ते हुए उसके चेहरे को अपने पास किया और उसके होंठों को किस करने लगा. वो भी मेरा साथ देने लगी. हम दोनों जीब से जीब मिलाकर एक दूसरे के होंठों को पीए जा रहे थे. कुछ देर किस करने के बाद मैंने उसके टॉप को खोल दिया. उसने ब्रा नहीं पहनी थी. उसकी दोनों संतरें मेरे आखों के सामने थी. मैं एक एक करके उसकी संतरें को पीने लगा. नीचे मेरे औजार में आग लगी थी. मैंने उसकी संतरें पीते हुए उसकी गुफा को कपड़े के उपर से सहलाने लगा. दो मिनट बाद मैं अपने सारे कपड़े खोल सिर्फ अंडरवियर में आ गया. सोनी की आखें बंद थी. तभी मैंने उसकी जीन्स को खोल कर फेंक दिया. अब वो सिर्फ पैंटी में थी. मैं उसकी पैरों को किस करने लगा. उसके मूँ से निकलती सिसकारियां अब मुझे पागल कर रही थी. फिर मैंने उसकी पैंटी को उतार दिया. मेरी बेहन की गुफा बिलकुल गुलाबी थी. उसे देखते ही मैं अपना मूँ उस पर लगाकर पीने लगा. पीने के दोरान सोनी ने दो बार पानी छोड़ा और मैं उसकी गुफा के पानी को पी गया. बेहन की गुफा का वो पानी किसी अमरित से कम नहीं था. उसके बाद मैं भी पूरा बिना कपडों का हो गया. मेरा औजार पूरा खड़ा था. मैंने सोनी को उठाकर अपना औजार उसके मुँँ के पास कर दिया. मगर वो दूर हट गई. वो बोली, भाईया, आपका तो बहुत बड़ा है. मैं तो मर जाओंगी. अगर ये अंदर गया तो.मेरा गुफा बहुत चोटा है. मैं बोला, तुम्हारी गुफा से इतना बड़ा बच्चा निकल जाता है, तो ये तो बहुत छोटा है उसके मुकाबले। फिर मैंने उसको अपने पास कर लिया और उसके मुँह में आउजार देकर पिलाने लगा। उसको गले में आउजार लगने लगा और सांस रुकने लगी। मगर मुझे उसक आउजार पिलाने में बहुत मजा आ रहा था। फिर हम दुबारा से 69 की पोजिशन में हो लिए। हम दोनों एक दूसरे के आउजार और गुफा को पी पी रहे थे कि तभी दर्वाजे की बेल बच गई। मगर उसी वक्त मेरा पानी भी निकल गया जिसे सोनी पी गई। फिर हम लोग जल्दी से हडबडा हट में उठे।

जब मैं बाहर आया तो मेरी चारों बेहन आ चुकी थी लेकिन उनके साथ मापापा नहीं थे। पूछने पर पता चला कि वो लोग मामा के यहां निकल गए और तीन दिन बाद आएंगे। उस दिन कुछ खास नहीं हुआ। रात को मैं अपने रूम में सो रहा था। अचानक से मेरी नीद खुल गई। मैंने देखा तो सोनी मेरा आउजार पी रही थी। उसे इस तरह से आउजार पीते देख मैं भी गर्म हो गया और उसको मजे से आउजार पिलाने लगा। कुछ देर के बाद मेरा माल निकल गया जिसे वो पी गई।

फिर वो बोली भाईया मैं आपको एक सर्प्राइज देना चाहती हूँ। मैं बोला क्या? फिर वो कुछ नहीं बोली और उसने मेरी आँखों पर पट्टी बांध दी। फिर दो मिनट के बाद मेरी आँखों की पट्टी उसने खोली और सामने का नजारा देखकर मुझे मेरी आँखों पर भरोसा नहीं हुआ। मेरी पांचों बेहने मेरे सामने बीना कपडों के खड़ी हुई थी। पांचों का बिना कपडों के बदन एक से बढ़कर एक था। यह देखकर मेरा आउजार जटका खा गया। वो फिर से तनाव में आने लगा। मोनी आकर सीधा मेरा आउजार मुँ में लेकर पीने लगी। यह देखकर जया भी मेरे दोनों पैरों के बीच बैठ कर मेरे आउजार के नीचे लटके रहे दोनों बॉल को पीने लगी।

इतने में ही मेरी सबसे बड़ी बेहन राणी मेरे पास आई और अपनी गुफा मेरे मूँ पर लगा दी और अपनी गुफा पिलाने लगी। तभी काजल दीदी आकर मेरे पूरे शरीर को पीने लगी और सोनी मेरी गोले में उंगली डाल कर अंदर बाहर करने लगी। मैं पांचों बेहनों के बीच में पागल सा होने लगा था। मेरे पूरे बदन पर उन्होंने कबजा कर रखा था। कुछ देर बाद ही मेरे मूँ पर गर्म गर्म पदार्थ निकल कर बहने लगा। राणी की गुफा का पानी मेरे मूँ पर निकल आया था। मैंने राणी दीदी की गुफा को पीक खाकर साफ कर दिया। उधर मोनी और जया मेरे आउजार और बॉल को पीए जा रही थी। उन्हें देखकर ऐसा लग रहा था कि दोनों मुझे खा कर ही दम लेंगी। तब तक काजल मेरे मूँ पर अपनी गुफा रख चुकी थी। ऐसे एक एक करके मैंने अपनी सारी बेहनों की गुफा को पिया और सब मेरे मूँ में ही जढड रही थी। तब तक मैं भी दो बार जढड चुका था। हम सब एक दूसरे का रस पीकर बैट पर लेट गए। मेरे बगल में पाँच बिना कपडों के गुफा थी। उनकी गर्मी से मेरा आउजार एक बार फिर से खड़ा हो गया।

सोनी बोली, भाईया का आउजार हमारी गुफा में जाने के लिए रेडी है। मैं बोला, तो पहले कौन लेना चाहेगी? सोनी बोली, राणी दीदी से शुरू कीजे। वो सबसे बड़ी है और आपका आउजार भी बहुत बड़ा है। राणी को मैंने अपनी ओर खींचा और किस करने लगा। तभी काजल मेरा आउजार पीने लगी। मेरा आउजार पूरा तन गया। मैंने राणी को बेड पर लिटा कर उसके दोनों पैरों को फैला कर उसकी गुफा पर मूँ रख दिया और पीने लगा। मैंने जया को इशारा किया कि अपने दोनों पैरों के घुटनों से इसकी दोनों हतेली दबा कर इसके मूँ पर गुफा रखे। उसने वैसा ही किया। उसने राणी के मूँ पर गुफा रख दी। अब मैंने काजल के गुफा से आउजार निकाला और राणी की गुफा पर रख दिया। मैंने धक्का दिया तो उसकी चीख जया की गुफा में निकली। जया ने उसके मूँ पर गुफा को कस दिया और गोले आगे पीछे करके उसको गुफा पिलाने लगी। काजल राणी के दोनों पंजों पर लेट गई और नीचे से मेरे बॉल को पीने लगी। सोनी ने बैट पर आकर मेरे मूँ पर गुफा लगा दी। अब राणी पूरी तरह से नीचे दबी हुई थी। मैंने सोनी के गुफा को पकड़ा और राणी की गुफा में आउजार का धक्का दे दिया। उसकी गुफा में मेरा मोटा आउजार घुज गया और उसकी गुफा से खून की धार निकल पड़ी। कुछ देर मैंने आउजार को गुफा में ऐसे ही रखा। फिर मैंने अपनी बेहन की गुफा में धक्के लगाना शुरू किया। अब धीरे धीरे वो ठुकाई का मजा लेने लगी। वो जया की गुफा में जीब से पिरही थी। कुछ देर की ठुकाई में ही वो जढड गई और जया की गुफा का रस भी राणी के मूँ में निकल गया। फिर दो मिनट के बाद मैं भी उसकी गुफा में स्खलित हो गया। नीचे काजल मेरे बॉल को पीते हुए अपनी गुफा में उंगली कर रही थी। और वो भी अब जढड गई। फिर मैंने अपना आउजार राणी की गुफा से निकाल नीचे बैठी काजल के मूँ में डाल दिया। वहाँ राणी की गुफा से मेरा माल बाहर निकल रहा था जहां पर मोनी ने अपना मूँ लगा दिया और पीकर उसकी गुफा को साफ करने लगी। फिर हम सब जढडने के कारण बीना कपड़ों के ही चिपक कर लेट गए। उन सब की गुफा के गर्मी से मेराआउजार आधे घंटे बाद फिर से फनफनाने लगा। इस बार मेरी दूसरी दीदी काजल की ठुकाई होने वाली थी। खड़ा आउजार देखकर राणी दीदी ने कान में कहा, इसकी भी मेरी जैसी ठुकाई करो, फाड़ दो इसकी गुफा को भी। तब तक जया मेरा औजार पीने लगी। मैंने काजल को नीचे लिटाया और उसकी गुफा मारी। जैसे राणी की गुफा मारी थी, वैसे ही मैंने एक एक करके अपनी सारी बेहनों की गुफा चीर दी। रात भर हम भाई बेहनों की ठुकाई का सिलसिला चलता रहा। अगले दिन उनकी गोले ठुकाई की बारी थी। सबसे मस्त गोले जया की थी, इसलिए राणी, काजल, सोनी मिलकर जया को गर्म करने लगी। मोनी मेरा औजार पीने लगी।

मैंने कहा, राणी, काजल, जया तीनों घोड़ी बन जाओ। पहले जया, फिर काजल और राणी ऐसे लाइन में घोड़ी बनो। मेरे कहने पर वो तीनों घोड़ी बन गई। अब मैंने सोनी को बोला कि वो जया और काजल के बीच में और मोनी को बोला कि वो काजल और राणी के बीच में उल्टी घोड़ी बने। यानि जिधर जया, राणी और काजल की गोले हैं, उधर तुम दोनों अपना मुझ करो। और जिधर इन तीनों का मुझ है, उधर अपनी गोले करो। सब वैसे ही हो गई। मैं अपना गोले लिये जया की गोले के पास था। मैं अपना आउजार सोनी के मुझ में डाल कर उसका मुझ खोदने लगा। इधर जया की गोले में क्रीम लगाकर मैं उसको खोदने लायक बना रहा था। जया सोनी की गुफा में उंगली किये जा रही थी, तो राणी मोनी की गुफा में। दूसरी साइड मोनी राणी की गुफा और गोले में उंगली किये जा रही थी। और सोनी का एक एक हाथ काजल और जया की गुफा में था।

मैंने सोनी के मुझ से आउजार निकाला और जया की गोले के गुफा पर अपना आउजार का टोपा रख दिया। उसकी कमर को पकर डियच कर जोर से धक्का दिया, जिससे मेरा आउजार जया की गोले में पूरी तरह से अंदर चला गया। जया के मुझ से जोरदार चीख निकली, जिससे पूरा रूम गूंज उठा। वो चीखने लगी। उसका दर्द देख मैंने कुछ देर आउजार को गोले में ही रखा। फिर मैं आउजार को आगे पीछे करने लगा। जया को भी मजा आने लगा। मैंने आउजार की रफ़तार को बहुत तेज कर दिया। जया के मुझ से जोर जोर से सिसकारिया निकलने लगी। आह, इस तरह से पांच मिनट की ठुकाई के बाद मैंने अपना आउजार जया की गोले से निकाल कर काजल की गोले में डाल दिया। कुछ देर काजल की ठुकाई की। फिर उसकी गोले से आउजार निकाल कर मोनी के मूँ में डाल दिया। कुछ देर मूँ खोदने के बाद आउजार को मैंने राणी की गोले में डाल दिया। थोड़ा ही आउजार अंदर गया था कि वो पेट के बल बैड पर गिर गई। उसके गिरते ही मैं भी उसके साथ गिरा, जिससे आउजार पूरी तरह से गोले में समा गया। बिना रुके मैंने उसकी गोले की ठुकाई शुरू कर दी। सोनी, मोनी, राणी, काजल और जया एक दूसरे की गोले और गुफा में उंगली किये जा रही थी।

थोड़ी देर बाद मैंने आउजार राणी की गोले से निकाला और दूसरी तरफ जाकर मोनी की गोले में डाल दिया और खोदने लगा। मोनी की गोले के दोनों साइट राणी और काजल का मूह था। इसलिए मोनी की गोले के साथ दोनों के मूह की ठुकाई भी करने लगा। कुछ देर बाद मैंने आउजार को सोनी की गोले में डाल दिया। अब सोनी की गोले के साथ काजल जया के मूह ठुकाई भी की। मैंने देखा कि पांचों बेहन जढडने के बाद अपनी गुफा से निकला पानी एक गिलास में जमा कर रही थी। मेरी सारी बेहने जढड चुकी थी और सब का जढडा पानी गिलास में था। अब मैं भी जढडने वाला था तो सोनी को बोला कि मैं तुम्हारी गोले में जढड जाता हूँ। मगर राणी बोली अजै तुम मेरे मूह में अपना माल गिराओ। फिर मैंने सोनी की गोले से आउजार को निकाला और राणी के मूह में आउजार दे दिया। उसके मूह में धक्के देते हुए मैं जढड गया। राणी दीदी का पूरा मूह मेरे माल से भर गया। फिर राणी दीदी ने सारा माल काजल दीदी के मूह में उगल दिया। फिर काजल ने जया के मूह में, जया ने मोनी के मूह में, मोनी ने सोनी के मूह में माल निकाल दिया। अब सारा माल सोनी के मूह में था और राणी, काजल, जया, मोनी अपना मूह खोल कर लेट गई। फिर सोनी ने थोड़ा-थोड़ा माल सब के मूह में गिरा दिया और थोड़ा अपने मूह में रख लिया। अब पांचों के मूह में थोड़ा-थोड़ा माल था। सब एक साथ मूह में रखे माल को गटक गई। और गिलास में जो गुफा से जढ़ा हुआ उन लोगों का पानी था उसे मैं पी गया। इस तरह से मैंने अपनी सभी बेहनों की ठुकाई की प्यास को बुजाया। आप लोगों को मेरी बेहनों की ठुकाई की ये फेन मिली ठुकाई कहानी कैसी लगी मुझे ज़रूर बताना.

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